लेखनी प्रतियोगिता -22-Jun-2022# पीपल का प्रेत
बात बहुत पुरानी हो चली थी ।आज सेफू ने कहा,"मां तुम इतनी निडर हो क्या कभी तुम्हें डर लगा है । मैंने तो तुम्हें कभी डरते हुए नही देखा।"
उस की बात सुनकर चिमनी देवी हंस पड़ी और बोली,"तोहे क्या पता लला ।ये जिगरा अब हुआ है पहले जब मै छोटी थी तो एक दिन बहुत बुरी तरह डर गयी थी। मुझे इतना डरावना सपना आया था कि पूरा साल भर मां का पल्लू पकड़ कर चलती थी।"
सेफू उत्सुकता वश बोला,"मां मुझे भी बताओ ना वो सपना ।मै भी सुनना चाहता हूं कैसे मेरी शेरनी सी मां को डर लगा।"
चिमनी देवी यादों के भंवर मे हिचकोले खाते हुए बोली,"लला सुन।जब मै दस बरस की रही होगी ।एक दिन मै अपनी नानी के यहां मां के साथ चली गयी थी पहले औरते मायके मे दो दो महीने रहकर आती थी ।मेरी मां भी दो महीने रहने वाली थी नानी के घर ।मेरे मामा के यहां बेटा हुआ था। सोई मां जचचगी पर गयी थी मै भी साथ मे चली गयी ।नानी का घर हमारे लिए एक किस्म से अपने घर जैसा था।साल मे पांच महीने हम वही रहते थे।नानी के घर के सामने एक बहुत बड़ा घेर (एक ऐसा मैदान जहां की जमीन उबड़ खाबड़ हो और जगह जगह कीकर के पेड़ और झाड़ झंखाड हो)था ।उसमे एक बहुत बड़ा पीपल का पेड़ था।नानी की गली के सब बच्चे वहां खेलते थे पर मेरी नानी को पता नही क्या था मै जब भी उस घेर मे खेलने जाती तो नानी डांटने लगती थी खासकर उस पीपल के पेड़ के पास तो जाने ही नही देती थी।एक दिन मैने झुंझलाते हुए पूछा,"नानी सब तो जाते है खेलने आप मुझे क्यों नही जाने देते।"तब नानी बोली,"लाली तुझे नही पता उस पेड़ पर प्रेतात्मा रहती है।वह पकड़ कर कच्चा ही खा जाती है।"
(ये मुझे बाद मे पता चला कि नानी मुझे उस घेर से इस लिए दूर रखना चाहती थी ताकि कोई जहरीला सांप वगैरह ना काट ले ।)
मैने जब सुना तो मुझे झुरझुरी सी आ गयी। मैंने नानी की तरफ आश्चर्य से देखा और बोली,"हैं नानी कच्चा ही खा जाती है ।"
नानी बोली,"और क्या। हड्डी भी नही छोड़ती।"
ये शाम की बात थी तब लोग चूल्हे पर खाना बनाते थे जल्दी जल्दी काम निपटा कर मां और नानी मामी के पास बैठ गयी । क्योंकि जचचगी मे जच्चा को शाम के समय अकेला नही छोड़ते।मै अपने मामा के बच्चों के साथ खेल रही थी । लेकिन खिड़की में से मुझे बार बार वही पीपल का पेड़ दिख रहा था ।मै उसे देखती और आंख मींच लेती।पहलू आठ बजे तक सब लोग सो जाते थे। इसलिए मां ने आकर मुझे कहा ,"लाली अब सो जा । बहुत टेम हो गया।"
मै भी आंखों मे नींद भरी होने के कारण पलंग पर जा कर लेट गयी । थोड़ी ही देर मे मुझे नींद ने अपने आगोश मे ले लिया। तभी मुझे एक डरावना सपना दिखाईं दिया।
मुझे ऐसे लगा जैसे नानी की गली मे मेरी एक सहेली बन गयी थी वो मुझे खेलने के लिए बुलाने आयी वो बोली,"चल चिममो खेले गी मेरे साथ ।हम घेर मे खेलने चलेंगे ।"मैने कहा,"ना री नानी ने घेर मे खेलने से मना किया है कहती है वहां कोई भूत प्रेत है।"
वह जोर से हंसी और बोली,"तेरी नानी भी ना । कोई भूत प्रेत नही है चल चलते है।"
इतना कहकर वह मुझे खींच कर घेर मे ले गयी।वह पर वह अपनी गुड़िया भी ले आयी थी ।हम दोनों गुड़िया के साथ खेल रहे थे कि तभी वह मेरी सहेली अजीब तरीके से मुझे घूरने लगी । मैंने उससे पूछा,"तुझे क्या हुआ?"
वह मर्दाना आवाज मे बोली ,"छोरी तू कहां से आयी है मैंने तुझे यहां कभी नही देखा।"
मुझे उससे डर लग रहा था मैने उसे हिलाते हुए कहा,"सिसो तुझे क्या हुआ।ऐसे मुझे क्यों डरा रही है ।"वह बोली,"मै तुझे डरा नही रही तुझे कच्चा खाने की सोच रही हूं।"यह कहकर वह जोर जोर से हंसने लगी।वह मेरी ओर अपने नुकीले दांत निकाल कर हंसते हुए दौड़ रही थी मै आगे आगे और वह पीछे पीछे।तभी रास्ते मे मुझे मां मिल गयी। मां मेरी ओर दौड़ी चली आ रही थी जब मै मां के पास पहुंची तो मां ने मुझे एक तरफ कर दिया और स्वयं उसके आगे जाकर खड़ी हो गयी चारों तरफ घुप अंधेरा था ।उसका रूप बदल गया था वह एक लम्बे चौड़े भूत के रूप मे परिवर्तित हो गयी थी।उसने मां को पकड़ लिया और उसने मां का एक हाथ उखाड़ दिया और उसे खा गया फिर दूसरा हाथ उखाड़ा और खा गया।वह धीरे धीरे मां को खत्म करता जा रहा था।मै चीखती जा रही थी कि मेरी मां को छोड़ दो।तुम मुझे खा लो ।पर जैसे वो सुन ही नही रहा था। मैं पागलों की तरह चीखती रही।वह मेरी मां को सारी को खा गया।तभी मेरी मां ने मुझे हाथ पकड़ कर जोर से हिलाते हुए उठाया ,*उठ लाली । क्या हुआ तुझे तू नींद मे ये क्यों कहकर रो रही है मां तुम मुझे छोड़कर नही जा सकती
और रोये जा रही हो।"
मै काफी समय बाद होश मे आयी और मैने सारा वाकया मां को बताया। मां बोली,"तुझे सिसो कैसे दिखी उसका तो पिछले साल निधन हो गया था।"
मै मां की तरफ आश्चर्य से देखने लगी। मुझे पता ही नही सिसो मर गयी है।मै बहुत बुरी तरीके से डर गयी थी।और पूरा साल भर मां का पल्लू पकड़ कर चलती थी ।कही वो पीपल के पेड़ वाला भूत मां को ना ले जाए मुझ से झीन कर।"
सेफू की आंखों मे आंसू थे मां का अपनी मां के प्रति प्यार देखकर।
shweta soni
08-Jul-2022 02:07 PM
Nice
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Seema Priyadarshini sahay
23-Jun-2022 10:53 AM
हॉरर में आपका जवाब नहीं मैम👌👌
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Abhinav ji
23-Jun-2022 07:51 AM
Nice
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